Khuda Hafiz 2 Review in hindi
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Khuda Hafiz 2 Review: विद्युत जामवाल ने दी अग्नि परीक्षा, खुदा हाफ़िज़ 2 में कुछ भी नया नहीं

जी स्टूडियोज के पास एक्शन फिल्म बनाने का एक शौक सा जाग उठा है। इस कंपनी के पास कोई कहानी हो या न हो लेकिन एक्शन के लिए इनके पास किसी भी चीज के कमी नहीं होती है। पहले ‘धाकड़‘ फिर ‘राष्ट्रकवच ओम‘ और अब ‘खुदा हाफ़िज़ 2‘।

विस्तार – Khuda Hafiz 2 फिल्म को बनाने में कुल 8 लोगो ने अपना दिमाग लगाया है, जिसमे कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक, स्नेहा बिमल पारेख, राम मीरचंदानी, संजीव जोशी, आदित्य चौकसे, हुसनैन हुसैनी और संतोष शाह, शामिल है।

“खुदा हाफ़िज़ 2 अग्निपरीक्षा” इतने सारे प्रोड्यूसर और इतने लंबे नाम की कोई खास जरूरत नही थी। इस फिल्म के लिए  ये एक बहुत बड़ा साइड इफेक्ट् है।

Khuda Hafiz 2 की कहानी में क्या है !

कहानी में कुछ यूं है की अगवा करके विदेश ले जाई गई अपनी बीबी को समीर बचाकर अपने वतन वापस लौटता है। समीर की बीबी नारगिश की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। जिसका इलाज भी चल रहा होता है। इसी बीच एक बच्ची भी परिवार में आती है। जिससे लगता है की नारगिश की हालत सुधरेगी लेकिन तभी इस बच्ची को अगवा कर लिया जाता है। फिर आगे क्या होना है आप अच्छे से समझ सकते है।

हिंदी फिल्म की सबसे बड़ी कमी यहीं है ये सिर्फ एक्शन के नजरिए से एक अच्छी फिल्म को देखते है और बहुत पैसे भी खर्च करते है। लेकिन एक अच्छी फिल्म के लिए एक अच्छी कहानी का होना भी जरूरी होता है जिस पर हिंदी फिल्म ज्यादा ध्यान नही देती है।

Khuda Hafiz 2 में हैं विद्युत जामवाल की अग्निपरीक्षा

विद्युत जामवाल 41 वर्ष के है। इन्होंने अपनी पहली फिल्म 2011 में की थी जिसका नाम ‘फोर्स’ था, इस फिल्म को सारी दुनिया ने देखा और बहुत सराहना दी। इन्होंने बीते 11 सालो में कुल 12 हिंदी फिल्म की है। इनकी पिछली 2 ओटीटी फिल्मे ‘सनक’ और ‘द पावर’ में दर्शको का कोई खास प्यार देखने को नही मिला या फिर ऐसा कहे की दर्शकों ने इन फिल्मों पर ध्यान भी नही दिया है। इसीलिए khuda Hafiz 2- Agni Pariksha को सिनेमा घरों में पहुंचना जरूरी था।

Khuda Hafiz 2: फारूक कबीर का निर्देशन

सभी को पता है की विद्युत जामवाल मार्शल आर्ट्स में एक निपूर्ण कलाकार है। हम ऐसा भी कह सकते है की ब्रूश ली की तरह यह भी इसमें एक अच्छे एक्सपर्ट है। मैं अगर अपनी बात करूं तो मुझको विद्युत जामवाल की ‘यारा’ फिल्म उनके करियर की सबसे बेहतरीन फिल्म लगी। इनके पास अभिनय की कोई कमी नही है। लेकिन वही बात करें इनको परदे पर उतारने की तो अभी तक इनको एक अच्छा निर्देशक नहीं मिला है। इनको तिग्मांशु धूलिया जैसे निर्देशक की जरूरत है।

यहीं पर अगर फारूक कबीर की बात करें तो इन्होंने विद्युत जमवाल के एक्शन पर पूरा ध्यान दिया है। लेकिन सिर्फ एक्शन किसी फिल्म को हिट करने के लिए काफी नही है। इन्होंने खुदा हाफ़िज़ और खुदा हाफ़िज़ 2 अग्निपरीक्षा में और किसी बात जैसे कहानी और म्यूजिक पर कोई खास ध्यान नही रखा है।

फारूक कबीर का निर्देशन Khuda Hafiz 2 फिल्म में औसत है। इन्होंने एक्शन के अलावा फिल्म की कहानी को कहने में ध्यान दिया ही नहीं है।

घिसी पिटी वहीं कहानी

ऐसी फिल्मों पूरा जोर एक्शन को दिखाने में लगा देते है। ढाई घंटे की Khuda Hafiz 2 Movie में दर्जनों एक्शन सीन रहते है। ऐसा ही कई सारे निर्माणकर्ता कर रहे है जिससे टाइगर श्रॉफ जैसे अच्छे कलाकारों अभिनय करियर संकट में डाल रखा है और अब विद्युत जामवाल का भी।

देखें या नही

जैसा की मेने आपको बताया है की फारूक कबीर ने अपने औसत निर्देशन ही दिया है। वहीं पर अगर हम जितन हमरीत सिंह के कैमरा दृश्यों की बात करें तो यह काफी प्रभावित करता है।  एडिटर संदीप फ्रांसिस को फिल्म को कम से कम 20 से 25 मिनट कम ही रखना चाहिए था। तभी यह फिल्म ओटीटी के लिए अच्छी रहती।

मिथुन, विशाल मिश्रा और शब्बीर अहमद ने मिलकर भी एक अच्छा और ढंग का गाना नहीं बना पाए है। वहीं पर अमर मोहिले का बैकग्राउंड म्यूजिक अच्छा है।

इस विकेंड पर जो एक इंग्लिश फिल्म देखना चाहते है वह थार: लव एंड थंडर को ज्यादा एंजॉय कर पाएंगे। जिनकी दिलचस्पी एक अच्छी कहानी को देखने में है वह रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट को देख सकते है। Khuda Hafiz 2 Agni Pariksha को ओटीटी में देखना है दर्शको के लिए बेहतर रहेगा।

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