बालमणि अम्मा
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बालमणि अम्मा (Balamani Amma) कौन है और गूगल ने कैसे दी इन्हे श्रद्धांजलि ? जाने इनके बारे में कुछ खास बाते ?

बालमणि अम्मा(Balamani Amma) एक भारतीय कवियत्री थी। इनको मलयालम कविता की मां और दादी कहा जाता है। गूगल ने भी बालमणि अम्मा की 133वीं जयंती पर उनके लिए डूडल को समर्पित किया है। जिसमे आपको एक दादी कुछ लिखते हुए दिखाई देंगी।

बालमणि अम्मा क्यों है इतनी चर्चित ?

बालमणि अम्मा को आज के समय में सभी कवि और कवियत्री नमन करते है क्योंकि इनकी कविताओं में एक बहुत अच्छा सुर मिलता है जिसको पढ़ने भर से आपके मन में आनंद की अनुभूति होने लगती है और इनकी कविताओं की वजह से ही इनको मलयालम कवि की ‘अम्मा’ (माँ) और ‘मुथस्सी’ (दादी)  कहीं जाती है। इनको ढेरो पुरस्कारों से नवाजा गया है और कवियों को सम्मानित करने के लिए भी इनके नाम का एक पुरस्कार दिया जाता है। आइए हम आपको इनके जीवन की रूप रेखा के बारे में कुछ खास बाते बताते है और इसके साथ आपको बताते है की गूगल ने इनको श्रद्धांजलि देने के लिए क्या किया है ?

Google ने किस प्रकार दी बालमणि अम्मा(Balamani Amma) को श्रद्धांजलि ?

गूगल ने बालमणि अम्मा की 133वीं श्रद्धांजलि को मानने के लिए अपना खुद का एक प्रोग्राम डूडल बनाया है जिसमे बालमणि अम्मा को एक कवियत्री के रूप में देखा जा सकता है। इसमें यह एक सफेद साड़ी पहने कई सारी किताबो से घिरी दिखाई देंगी।

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कौन थी बालमणि अम्मा ?

Balamani Amma का जन्म आज के दिन 19 जुलाई 1909 में त्रिशूर जिले में स्थित पुन्नयुरकुलम में उनके पैतृक घर नालापत में हुआ था। इनको इनकी कविताओं के लिए कई सारे पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था जिनमे से सरस्वती सम्मान और पद्म भूषण भी शामिल है। अगर इनकी शिक्षा की बात की जाए तो इन्होंने अपने जीवन में कोई खास शिक्षा प्राप्त नही की है न ही अपने जीवन काल में ये कभी शिक्षण के लिए गई थी किंतु इनके चाचा जिनका नाम नलप्पट नारायण मेनन था यह मलयालम के एक अच्छे कवि थे। इन्होंने ही इनको घर पर शिक्षा दी थी।

बालामणि अम्मा की शादी मात्र 19 वर्ष की आयु में मलयालम अखबार मातृभूमि के प्रबंध निदेशक और प्रबंध संपादक वीएम नायर के साथ हुई। बालामणि अम्मा कमला दास की मां थी। इनको 1984 में साहित्य के नोबेल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया था। इस महान कवियत्री का निधन 29 सितंबर 2004 में कोच्चि में 95 वर्ष की आयु में हुआ था।

बालामणि अम्मा को मलयालम की दादी क्यों कहा जाता है ?

बालामणि अम्मा की कविता महिला पात्रों की पारंपरिक समझ पर एक नई राह की तरह थी। बालामणि अम्मा की प्रारंभिक कविताओं की बात करें तो इसमें इन्होंने मातृत्व को एक नए नजरिए से दिखाने का प्रयास किया है जो की पाठको को बहुत पसंद आया। और फिर इनकी इस मातृत्व से जुड़ी कविताओं की वजह से इनको मातृत्व की कवियत्री कहा जाने लगा। या फिर ऐसा कहे की इनको मलयालम की कविताओं की दादी कहा जाने लगा।

बालामणि अम्मा का करियर ?

बालामणि अम्मा ने 20 से अधिक कविता संग्रह, कई गद्य संग्रह, और अनुवाद प्रकाशित किए है। इनको बचपन से ही कविताएं लिखने का शौक था। और इनकी पहली कविता कूप्पुकाई 1930 को प्रकाशित हुई।

बालामणि अम्मा के कुछ खास पुरुष्कार ?

यह एक बहुत अच्छी कवियत्री थी जिसकी वजह से इनको कई सारे सम्मान व कई सारे पुरस्कार दिए गए थे जिनमे से कुछ का उल्लेख मेने नीचे किया है।

  • सरस्वती सम्मान
  • मुतासी के लिए केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार (1963)
  • मुतासी के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (1965)
  • आसन पुरस्कार (1989)
  • वैलेटोल पुरस्कार (1993)
  • ललिताम्बिका अंधर्जन पुरस्कार (1993)
  • शिक्षा पुरस्कार (1995)
  • एन.वी. कृष्णा वारियर अवार्ड (1997)
  • 1987 में पद्म भूषण पुरस्कार।

बालामणि अम्मा के काव्य संकलन

इन्होंने अपने जीवन में कई सारे काव्य संकलन लिखे है इनमे से इनकी विशेषता यही है की यह मातृता को बहुत महत्व देती थी जो की इनके काव्य में पता चलता है। मैं आपको इनके कुछ काव्य के नाम व कब प्रकाशित हुई यह बताता हूं।

  • कुदुम्बिनी (1936)
  • धर्ममार्गताल (1938)
  • श्री हृदयम (1939)
  • प्रभांकुरम (1942)
  • भवनयाल (1942)
  • ओंजलिनमेल (1946)
  • कालीकोट्टा (1949)
  • वेल्लीचथिल (1951)
  • हमारा पैर (1952)
  • प्रणम (1954)
  • लोकंतरंगल (1955)
  • सोपानम (1958)
  • मुतासी (1962)
  • माजुविंटे स्टोरी (1966)
  • अंबातिलेकु (1967)
  • नागरथिल (1968)
  • वेलारामबोल (1971)
  • अमृतंगयम (1978)
  • संध्या (1982)
  • निवेद्यम (1987)
  • मेरी बेटी (मलयालम) कुलक्कडविली

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बालामणि अम्मा की कविताएं | Balamani Amma Poetry

Balamani Amma tribute

इन्होंने अपने जीवन में कई सारे मलयालम कविताएं लिखी है जो की लोगो को बहुत पसंद है, मैं आपको इनकी कुछ कविताओं के नाम और कब प्रकाशित हुई यह बताता हूं।

  •    कूप्पुकई (1930)
  •    अम्मा (1934)
  •    कुटुंबनी (1936)
  •    धर्ममर्गथिल(1938)
  •    स्त्री हृदयम (1939)
  •    प्रभंकुरम (1942)
  •    भवनईल (1942)
  •    ऊंजलींमेल (1946)
  •    कालिकोट्टा (1949)
  •    भावनाईल (1951)
  •    अवार पेयदुन्नु (1952)
  •    प्रणामम (1954)
  •    लोकांठरांगलील (1955)
  •    सोपनाम (1958)
  •    मुथास्सी (1962)
  •   अंबलथीलेक्कू (1967)
  •   नगरथिल (1968)
  •   वाईलारुंम्पोल (1971)
  •   अमृथंगमया (1978)
  •   संध्या (1982)
  •   निवेद्यम (1987)
  •   मथृहृदयम (1988)

बालामणि अम्मा की पहली कविता क्या थी ?

कोप्पुकाई Balamani Amma की पहली कविता थी।

बालामणि की शादी किससे हुई थी ?

इनकी शादी मलयालम के अखबार के प्रबंध निदेशक वीएम नायर के साथ हुई थी।

इनकी पुत्री का नाम क्या था ?

कमला दास।

इनकी मृत्यु कब हुई थी ?

29 सितंबर 2004 को जब इनकी आयु 95 वर्ष की थी।

अंतिम कुछ शब्द

दोस्तो आज मेने आपको अपने लेख के माध्यम से बालामणि अम्मा में बारे में बहुत सी बाते बताई है जिससे आपको अंदाजा लग गया होगा की यह कितनी योग्य कवियत्री थी। मैं आशा करता हूं की मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपको लाभ देगी।

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